हमने तो खुद ही मौत चाही है तेरे  खंज़रे हुस्न से
मौत भी हो जाती है  हसीन तेरे खंज़र ऐ  हुस्न से

मुकेश इलाहाबादी -------------------------------------

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एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है