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Showing posts from December, 2016

कभी अच्छा तो कभी बुरा दिखाता है

कभी अच्छा तो कभी बुरा दिखाता है वक़्त इंसाँ को बहुत कुछ सिखाता है परिंदों को उड़ना मछलीयों को तैरना बुलबुल को चहकना कौन सिखाता है जो कुछ कर गुज़रे वही अपना नाम इतिहास की किताबों में लिखाता है मुकेश बाबू लाख कोशिश कर ले कोई तज़र्बा तो उम्र के साथ -साथ आता है   मुकेश इलाहाबादी ------------------

दर्द जब हद से गुज़रेगा

दर्द जब हद से गुज़रेगा कोई भी हो वो चीखेगा तुम चुप हो जाओगे तो सन्नाटा तुमसे बोलेगा जब कोई अपना होगा तो ही, टोकेगा रोकेगा गर असली कुंदन है तो आग में और निखरेगा देखना इक दिन मुकेश चन्दन बन के महकेगा मुकेश इलाहाबादी -------   

काली दे या कि गोरी दे

काली दे या कि गोरी दे मुझको भी इक छोरी दे सीधी हो कि, नकचढी दुल्हन चाँद चकोरी दे न तो टूटे न खुले जो प्यार की ऐसी डोरी दे ऐ-मौला मुकेश को भी धन से भरी तिजोरी दे मुकेश इलाहाबादी ---

इक बार चाँद छूने की तमन्ना है

इक बार चाँद छूने की तमन्ना है इक बार तुझे पाने की तमन्ना है अपने उजड़े हुए गुलशन को,तेरी   सोहबत से सजाने की तमन्ना है इक गुनाह करने के तमन्ना है तेरा दिल चुराने की तमन्ना है तू इक किनारा मैं वो किनारा इक पुल बनाने की तमन्ना है मैं खामोश हो जाऊँ इसके पहले तुजे ग़ज़ल सुनाने की तमन्ना है मुकेश इलाहाबादी -------------

कुछ इस तरह से दिल बहलाते रहे

कुछ इस तरह से दिल बहलाते रहे आप को याद कर के मुस्कुराते रहे यूँ तो पतझड़ ही रहा अपने हिस्से हाँ तेरी यादों के मोगरा खिलाते रहे भूल जाने की उनकी बुरी आदत है ईश्क़ क्या है हमी, याद दिलाते रहे ज़िंदगी की कोई बाज़ी वो हारे नहीं लिहाज़ा हम ही दिल हार जाते रहे मुकेश इलाहाबादी -----------------

ज़माने भर के तज़ुर्बे ने हमको भी कमीना बना दिया

ज़माने भर के तज़ुर्बे ने हमको भी कमीना बना दिया वरना मुकेश हम भी कभी बड़े मासूम हुआ करते थे मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------

ज़माने भर के तज़ुर्बे ने हमको भी कमीना बना दिया

ज़माने भर के तज़ुर्बे ने हमको भी कमीना बना दिया वरना मुकेश हम भी कभी बड़े मासूम हुआ करते थे मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------

मेरी तरह किसी के हिज़्र में होगा आफ़ताब

मेरी तरह किसी के हिज़्र में होगा आफ़ताब वरना इस कदर न जल रहा होता आफ़ताब सुना है, सदियों से किसी की ज़ुस्तज़ू में है, मुकेश बिन रुके तभी तो चल रहा आफ़ताब मुकेश इलाहाबादी ----------------------------

घाव कभी अयाँ न किया

घाव कभी अयाँ न किया दर्द  कभी बयाँ न किया रात ही रात रही उम्र भर इसलिए अजाँ  न किया शुरुआत में ही कुचल डाले ख्वाबों को  जवाँ न किया मुकेश इलाहाबादी -----

खामोश दरिया बहता रहा अपने दरम्यां

खामोश दरिया बहता रहा अपने दरम्यां इक पुल भी न बन सका, अपने दरम्यां माटी थी, धूप थी हवा थी पानी था,मगर  गुले ईश्क़ न खिल सका, अपने दरम्यां मुकेश इलाहाबादी --------------------

इक खामोश दरिया बहता रहा अपने दरम्यां

इक खामोश दरिया बहता रहा अपने दरम्यां उम्र भर कोई पुल न बन सका अपने दरम्यां मुकेश इलाहाबादी ----------------------------

माथे पे जब सज जाती है ये बिंदिया

माथे पे जब सज जाती है ये बिंदिया सभी को बहुत लुभाती है ये बिंदिया हथेली के बीच ले के चूमूँ तेरा चेहरा अँधेरे में भी जगमगाती है ये बिंदिया अपनी जगह से फ़ैल के ये कुमकुम रात की कहानी बताती है ये बिंदिया आसमाँ के आँचल में सुबह का सूरज किरणों सा फ़ैल जाती है ये बिंदिया माँ के माथे पे गरिमा लगे, पत्नी के माथे पे बहुत इठलाती है ये बिंदिया मुकेश, थोड़ा सा भी प्यार मांगे तो बहुत नखरे दिखाती है, ये बिंदिया मुकेश इलाहाबादी ----------------------

जैसे, एक कंघी नए शेड की लिपिस्टिक

जैसे, एक कंघी नए शेड की लिपिस्टिक आई ब्रो लाइनर हेयर बैंड कंगन और चूड़ियों के एक दो सेट कुछ छुट्टे पैसे कुछ छोटे कुछ बड़े नोट और दो चार पुराने कैश मेमो व ज़रूरी कागज़ात बस ऐसे ही सहेज लो तुम मेरी यादें मेरी बातें मेरे अहसास अपने वैनिटी बैग में जिसे कोई छू भी न पाए बगैर तुम्हारी इज़ाज़त के मेरी प्यारी सुमी, बस इत्ती सी इल्तज़ा है, मुकेश इलाहाबादी -----

अक्सर, जब कभी मैं मशगूल होता हूँ किसी ज़रूरी काम में,

अक्सर, जब कभी मैं मशगूल होता हूँ किसी ज़रूरी काम में, उसी वक़्त, तुम ,, लाड़ में, पीछे से आकर कंधो पे अपनी ठोड़ी रख कर मुस्कुरा के पूछती हो, "किस काम में इत्ता मशगूल हो ?' सच ----- तब ऐसा लगता है जैसे, नाचती हुई धरती आ गिरी हो सूरज की गोद में मेरी प्यारी सुमी ,,,,,, मुकेश इलाहाबादी -----

मेरे पास, कुछ भी नहीं है

मेरे पास, कुछ भी नहीं है तुम्हे देने को, सिवाय खुली खिड़की  बड़ा खूब बड़ा आसमाँ सुहानी शाम अंजुरी भर, मोगरा के फूल और ,,,,, ढ़ेर सारा प्यार, ग़र , इत्ते में निबाह कर सकती हो, तो आ जाना, मिलूंगा तुम्हे इंतज़ार करता उसी ठाँव, जहाँ छोड़ गयी थी तुम मुझे, पहले बहुत पहले (मेरी प्यारी सुमी) मुकेश इलाहाबादी ---

जब से तुम्हारा आना जाना हो गया

जब से तुम्हारा आना जाना हो गया शहर का मौसम भी सुहाना हो गया लोग भूल बैठे थे  ईश्क़  करना, अब हर  कोई  तुम्हारा  दीवाना हो गया सुना है तुम्हारी तबियत नासाज़ है तुमसे  मिलने  का  बहाना हो गया मुकेश तुम्हारी आँखों के आईना में अपनी सूरत देखे ज़माना हो गया मुकेश इलाहाबादी ---------------------

जब से तुम्हारा आना जाना हो गया

जब से तुम्हारा आना जाना हो गया शहर का मौसम भी सुहाना हो गया लोग भूल बैठे थे  ईश्क़  करना, अब हर  कोई  तुम्हारा  दीवाना हो गया सुना है तुम्हारी तबियत नासाज़ है तुमसे  मिलने  का  बहाना हो गया मुकेश तुम्हारी आँखों के आईना में अपनी सूरत देखे ज़माना हो गया मुकेश इलाहाबादी ---------------------

मेरी नज़्म मेरी ग़ज़ल मेरी रुबाई ले ले

मेरी नज़्म मेरी ग़ज़ल मेरी रुबाई ले ले मेरा दुःख, मेरा दर्द मेरी तनहाई ले ले यकीं कर मुझपे, तेरा हूँ  तेरा ही रहूँगा तू चाहे तो चाँद तारों की गवाही ले ले जा रहे हो जाओ मगर जाने के पहले दिल से ज़ेहन से यादों से विदाई ले ले मुकेश इलाहाबादी ---------------------

सुखः दुःख बतियाओगे कब

सुखः दुःख बतियाओगे कब मुझसे मिलने आओगे कब है, सावन की पहली बारिश, हाथ पकड़ कर भीगोगे कब झूठ- मूठ की बातों को ले के फिर तुम मुझसे रूठोगे कब दिल के कोरे काग़ज़ पे तुम ईश्क़ की बात लिखोगे कब मैंने तो कह दी अपनी बात तुम अपने लब खोलोगे कब मुकेश इलाहाबादी -----------

शख्श बहुत खुशनसीब होगा

शख्श बहुत खुशनसीब होगा आपको जिसका इंतज़ार होगा फरिश्तों को भी रश्क होगा !! जिससे आप को प्यार होगा खुशी से पागल न हो जाऊँ ? जिस दिन तेरा दीदार होगा मुकेश इलाहाबादी ------------