दिन आफताब रात महताब चाहिए
दिन आफताब रात महताब चाहिए थोडी सी तपन थोड़ा सा आब चाहिए सिर्फ हकीकत से काम चलता नहीं जिंदगी के लिए कुछ ख्वाब चाहिये मुकेश इलाहाबादी --------------------
“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”