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Showing posts from May, 2019

रास्ते तो हैं मगर दुश्वारियां बहुत हैं

रास्ते तो हैं मगर दुश्वारियां बहुत हैं इश्क़ की राह मे रूसवाईयां बहुत हैं बड़े हो गए उड़ गए सब परिंदे घर मे मेरे अब तन्हाईयाँ बहुत है ज़माने की जुबाँ pe ज़हर रख गया कोई लोगों की बातों मे तल्खीयां बहुत है सुनते रहो मुझे राह कट जाएगी सुनाने को मेरे पास कहानियां बहुत हैं मुकेश इलाहाबादी,,,,,,,,,

तुम्हारा मुस्कुराना

तुम मुस्कुराती हो तो लगता है जैसे किसी ने तपती हुई देहं में लेप दिया हो  चन्दन का लेप इस लिए तुम्हारा मुस्कुराना मेरे जलते हुए वज़ूद के लिए बहुत ज़रूरी है बहुत ज़रूरी मुकेश इलाहाबादी ---------------------