फूलों की बात
ये, सच है। ख़ुदा की क़ायनात में सब कुछ बहुत - बहुत खूबसूरत है। लेकिन फूलों की बात बिलकुल अलहदा। इंसान कितना भी थका हो परेशान हो फूलों की संगत में आते ही फूलों की रंगत फूलों की खुशबू फूलों की नज़ाकत इंसान को ताज़ा दम कर देती है इक खुशी इक ऊर्जा से लबरेज़ कर देती है और शायद यही वजह है हर मज़हब में हर इबादत में हर खुशी में हर रंजो ग़म में फूलों को इस्तेमाल किया जाता है लेकिन फूल कितना ही खूबसूरत हो कितना ही खुशबू से लबरेज़ हो उसकी ज़िंदगी की मियाद बहुत थोड़ी होती है इसी लिए हर बात पूजा में इबादत में इंसान को नए नए और ताज़े फूलों की ज़रूरत होती है लेकिन "ईश्क़" एक ऐसा फूल है जो अगर इंसान की ज़िंदगी में खिल गया तो फिर ताज़िंदगी नहीं मुरझाता जिसकी खुशबू ताज़गी ताज़िंदगी क़ायम रहती है ये और बात वक़्त की धूप और ज़िंदगी में तूफ़ान में मुरझा जाए लेकिन थोड़ी भी अनुकूल हवा पानी और धूप मिली नही कि ये ईश्क़ का फूल फिर से खिल जाता है महमहने लगता है थके से थके ग़मज़दा से ग़मज़दा इंसान में फिर से जीने की तमन्ना पैदा कर देता है सुमी ! ऐसा ही एक खूबसूरत हो तुम मेरी ज़िंदगी में ...