दर्द जब हद से गुज़रेगा


दर्द जब हद से गुज़रेगा
कोई भी हो वो चीखेगा

तुम चुप हो जाओगे तो
सन्नाटा तुमसे बोलेगा

जब कोई अपना होगा
तो ही, टोकेगा रोकेगा

गर असली कुंदन है तो
आग में और निखरेगा

देखना इक दिन मुकेश
चन्दन बन के महकेगा

मुकेश इलाहाबादी -------   

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