कमरे में एक छोटी सी खिड़की है

मेरे
कमरे में एक छोटी सी खिड़की है
जिससे मै देखता हूँ
छोटा सा आसमान
छोटी सी चिडि़या
छोटा सा बादल
छोटी सी दुनिया
और मै, खुश हो कर
अपनी छोटी सी
हथेली उस छोटी सी खिड़की के बाहर निकाल कर अपनी मुट्ठी में
कर लेना चाहता हूँ
छोटा सा आसमान
छोटा सा बादल
छोटी सी चिड़िया
लेकिन मैं नहीं कर पाता ऐसा, तब मै निराश हो कर अपनी हथेली वापस खींच कर
छोटे से कमरे की बड़ी सी दुनिया में लौट आता हूँ
जिसका हिस्सा मै हूँ भी
और नहीं भी
मुकेश इलाहाबादी,,,,,,

Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-07-2019) को "आशियाना चाहिए" (चर्चा अंक- 3404) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-07-2019) को "आशियाना चाहिए" (चर्चा अंक- 3404) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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