झील सी आखों में लरजता सा महताब


 झील सी आखों  में लरजता सा महताब
दूज के चाँद सा तबस्सुम आपने पायी है

ये हुस्न, हया और गज़ब की नज़ाकत
ख़ुदा ने आपपे बेइइंतहां दौलत लुटाई है 

ख़ुदा ने तो अपनी कारीगरी दिखा दी,,
मग़र देखने वालों की जाँ पे बन आयी है 

मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

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