पूजना तुझे मंदिर में, तेरा नसीब था

बैठे ठाले की तरंग --------------------

पूजना तुझे मंदिर में, तेरा नसीब था
फिरते रहना  दरबदर,मेरा नसीब था

अब्र  का  टुकडा बिन  बरसे चला गया 
उम्रभर तीश्नालब रहना मेरा नसीब था 

चाँद बन तुम मिरे आँगन में उग आये,
पै,आफताब सा जलना मेरा नसीब था 

मुकेश इलाहाबादी ------------------------

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