खुदा मुझको बुलाये और


बैठे ठाले की तरंग ------------------------------------------
खुदा मुझको बुलाये और मै न जाऊं ये तो हो  सकता है
आप बुलाएं औ हम ना आएं ये मुमकिन हो नहीं सकता
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------------

मुकेश इलाहाबादी ------------------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है