तन्हाइयों की छाँव में सोया हुवा था मुसाफिर

 

 तन्हाइयों की छाँव में सोया हुवा  था मुसाफिर
आँचल की हवा से तुमने अरमान जगा दिया
होश नहीं हमको पीने के बाद तेरी बज़्म मे
जाम ऐ मुहब्बत ये तुमने कैसा पिला दिया ?
मुकेश इलाहाबादी --------------------------------

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