जिस्म पे अपने कुछ कांटे उगा लिए

 


जिस्म पे अपने कुछ कांटे उगा लिए
उम्मीद पे कि कुछ फूल खिलेंगे गुलाब के
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------

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