ख्वाब भी अकसर
ख्वाब भी
अकसर
औकात देख कर आते हैं
गरीब लडकी
की आखों मे
घोड़े पे राजकुमार नहीं आते
रोटियाँ ही रोटियाँ
नज़र आती है
नींद में
रात जब बच्चे
भूखे सो जाते हैं
तब
माँ बाप की आखों मे
ख्वाब नहीं मजबूरियां आती हैं
ख्वाब भी अक्सर
औकात देख कर आते हैं
मुकेश इलाहाबादी ---
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