लज्ज़ते समर भूल जाऊं सारे चमन का






















लज्ज़ते समर भूल जाऊं सारे चमन का
जो मिल जाए स्वाद तेरे सेबे ज़कन का
मुकेश इलाहाबादी ----------------------

समर - फल, लज्ज़त -स्वाद,
सबे  ज़कन - सेब जैसी ठुड्डी

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है