न कुछ इस तरह जल सके कि लपटें उठा करें





न कुछ  इस तरह जल सके  कि  लपटें उठा करें
न अंगार की माफिक खुद को जला चमका सके,
फक्त कुछ चिंगारियां सीली लकड़ी से उठा किये।।
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------- 

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