उदासी का शबब

उदासी का शबब
अब हमसे न पूछिये
बहुत चोट खाये हुए हैं
जमाने से हम
अब जा के
एक फूल मयस्सर हुआ, हमे
तुम्हारी दोस्ती का,
तब जा के हम मुसकुराए हैं

मुकेश इलाहाबादी .............

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है