वो कोई और खुशनसीब होंगे

 

वो कोई और खुशनसीब होंगे जो,मुहब्बत की पाती लिखा करते हैं
हम तो यंहा  उनकी बेरुखी ओर तनहाइयों का दीवान लिये बैठे है
मुकेश  इलाहाबादी ................................................

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