कूचा ए इष्क हमने है छोडा जबसे





कूचा ए इष्क हमने है छोडा जबसे
उदास रहने लगी हैं कलियॉ तबसे

मुकेश  इलाहाबादी .................

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है