कल तक तो जाँ था ज़िगर था साँसे था,,,

कल तक तो जाँ था ज़िगर था साँसे था,,,
ज़रा सी बेरुखी मे सनम बेवफा हो गया?
मुकेश  इलाहाबादी ------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है