एक और मुल्क बनवा दीजिये मज़हब के नाम पे

एक और मुल्क बनवा दीजिये मज़हब के नाम पे
कुछ और  दंगे करवा दीजिये महज़ब के नाम पे,,

सिर्फ नारों और बातों से फिर  मिल जाएगी सत्ता
कुछ और सिर कटवा दीजिये महज़ब के नाम पे

अमन  और  खुशहाली देश मे अच्छी नहीं लगती  
भाई - भाई को लडवा दीजिये महज़ब के नाम पे

घोटालों और नाकामियों से जनता न हो जाए बागी
फिर सौ दो सौ घर जलवा दीजिये महज़ब के नाम पे

गर कुछ शर्म और गैरत बाकी रह गयी हो दिल मे
बंद करो जनता को बरगलाना महज़ब के नाम पे 

मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------


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