चलो आओ काम हम कोई तूफानी करें

चलो आओ काम हम कोई तूफानी करें
हवा मे रंग घोलें मौसम शादमानी करें

लहरा के तेरी चुनरी इन फ़िज़ाओं मे
सुर्ख बादलों का रंग फिर आसमानी करें

तुम चुराओ चैन मेरा औ मै चुराऊँ दिल
आओ एक दूजे से थोड़ी बेईमानी करें

तुम कहो मुझे दीवाना औ मै कहूँ  मगरूर
आओ शीरी बातों के बीच बदज़ुबानी करें

तुम मुझे उकसाओ और मै लूं तेरा बोसा
आओ मुहब्बत मे थोडा छेड़खानी करें

मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है