उम्रभर बेगानों की तरह साथ रहने से

उम्रभर बेगानों की तरह साथ रहने से
मुहब्बत भरी इक मुलाक़ात अच्छी है

झूठ के पुल से दरिया पार किया जाए
इससे तो दिलों के बीच दीवार अच्छी है

मुकेश ताउम्र झूठ का पैमाना पीता रहूँ
इससे बेहतर तो मेरी ये प्यास अच्छी है

मुकेश इलाहाबादी --------------------------

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