कब्र पे अपनी खुद फ़ातिहा पढ़ आये
कब्र पे अपनी खुद फ़ातिहा पढ़ आये
बाद मरने के मेरे कोई आये न आये
पैगामे आख़िरी रुखसती कहला दिया
मेरी बला से अब चाहे आएं या न आएं
हमने तो दे दिया जाँ मुहब्बत के नाम
मातमपुर्शी को भी कोई आये न आये
मुकेश इलाहाबादी -----------------------
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