कुछ तो ख़्वाब सुनहरे बुन लूँ
कुछ तो ख़्वाब सुनहरे बुन लूँ
तुझको अपना साथी चुन लूँ
तू मेरे घर आये इसके पहले
मै प्रेम पंथ के कंकर चुन लूँ
राग मिलन न जाना अबतक
कहे तो तेरी धड़कन सुन लूँ ?
कहे तो तेरे गज़रे की ख़ातिर
फ़लक से चाँद सितारे चुन लूँ
तो बोले तो जैसे सरगम बाजे
ग़र छेड़ूँ ग़ज़ल तो तेरी धुन लूँ
मुकेश इलाहाबादी -------------
तुझको अपना साथी चुन लूँ
तू मेरे घर आये इसके पहले
मै प्रेम पंथ के कंकर चुन लूँ
राग मिलन न जाना अबतक
कहे तो तेरी धड़कन सुन लूँ ?
कहे तो तेरे गज़रे की ख़ातिर
फ़लक से चाँद सितारे चुन लूँ
तो बोले तो जैसे सरगम बाजे
ग़र छेड़ूँ ग़ज़ल तो तेरी धुन लूँ
मुकेश इलाहाबादी -------------
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