आधी सदी चलते रहे

आधी सदी चलते रहे
यूँ ही तनहा बढ़ते रहे

वो और लोग रहे होंगे
कारवाँ  में चलते रहे

धुंध तीरगी आँधियाँ 
मुश्किलों में बढ़ते रहे

सोचता हूँ तो लगता है
ज्यूँ ख्वाब में चलते रहे

मुहब्बत आग का दरिया
मुकेश डूब कर बढ़ते रहे 

मुकेश इलाहाबादी ----

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