है अपनी कोई चाह नही
है अपनी कोई चाह नही
दुनिया की परवाह नहीं
देख समंदर इतना गहरा
है जिसकी कोई थाह नही
दर्द के मारे दोहरा था, पर
निकली उसकी आह नही
बड़े हुलस के मिलने जाऊं
अपना ऐसा भी उत्साह नहीं
मुकेश तेरे दर पर आना है
ये इतनी भी आसाँ राह नहीं
मुकेश इलाहाबादी ------------
दुनिया की परवाह नहीं
देख समंदर इतना गहरा
है जिसकी कोई थाह नही
दर्द के मारे दोहरा था, पर
निकली उसकी आह नही
बड़े हुलस के मिलने जाऊं
अपना ऐसा भी उत्साह नहीं
मुकेश तेरे दर पर आना है
ये इतनी भी आसाँ राह नहीं
मुकेश इलाहाबादी ------------
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