विडम्बना ---

विडम्बना ---
अक्सरहाँ ग़म भी इतना अज़ीज़ हो जाता है,,,
मुकेश चाह कर भी किसी से बांटा नहीं जाता है
मुकेश इलाहाबादी ------------------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है