मुझी को मेरा पैगाम लौटा के

मुझी को मेरा पैगाम लौटा के मुकेश कहने लगी निगोड़ी हवा
महबूब के घर देख कर बजती शहनाइयाँ बैरंग लौट आयी यहाँ 
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------------------

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