ख्वाब तो हमने भी देखे थे मुस्कुराती सुबह की



ख्वाब तो हमने भी देखे थे मुस्कुराती सुबह की
ये और बात ग़म के बादलों ने आसमाँ ढक लिया

मुकेश इलाहाबादी ------------------------------------

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