अँधेरा सन्नाटा और उल्लू की आवाज़ है

अँधेरा सन्नाटा और उल्लू की आवाज़ है
देखते जाओ ये तो बरबादी का आगाज़ है
अजब अहमक हो यहां गुलशन ढूंढते हो ?
देखते नहीं, हर घर और दिल में बाज़ार हैं
मुकेश इलाहाबादी -------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है