लगा के मलमल का परदा सोचतें हैं वो

लगा के मलमल का परदा सोचतें हैं वो
रोक लेंगे चाँदनी को ज़माने की नज़र से
ख़ुद को चिलमन में छुपा के सोचते हैं वो
खुशबू ऐबदन  छुपा लेंगे ज़माने की नज़र से  
मुकेश इलाहाबादी -------------------------

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