ग़र तू हमसफ़र हो जाएगा

ग़र तू हमसफ़र हो जाएगा
सफर खूबसूरत हो जाएगा
प्यार इक पाक़ सी नदी है
नहाके ताज़ादम हो जाएगा
उज़डे चमन सा तेरा वज़ूद
हरा भरा चमन हो जाएगा
इक बार जो मुस्कुरा दो,तो
चेहरा गुलमोहर हो जाएगा
बादल सी ज़ुल्फ़ें झटक दो
ये सहरा समंदर हो जाएगा 

मुकेश इलाहाबादी ---------

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