खून भी अब पानी हो गया

खून भी अब पानी हो गया
हर रिश्ता बेमानी हो गया
ये प्यार मुहब्बत झूठी बाते
ईश्क भी जिस्मानी हो गया
दो दिन बादल क्या बरसे,
ज़मी का रंग धानी हो गया
तूने अपनी चुनरी लहरायी
फ़लक आसमानी हो गया
महफिल मे तेरे आने से ही
माहौल शादमानी हो गया
कल तक था जो अजनबी
आज जिन्दगानी हो गया
मुकेश इलाहाबादी ---------------

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