भले ही जुबॉ अपनी खामोश रखती है
भले ही जुबॉ अपनी खामोश रखती है
मगर निगाहें उसकी सब कुछ बोलती हैं
मगर निगाहें उसकी सब कुछ बोलती हैं
सच तो ये है उसे भी हमसे मुहब्बत है
ये अलग बात आदतन मगरुर रहती है
ये अलग बात आदतन मगरुर रहती है
मुकेश इलाहाबादी ---------------------
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