मै अपनी ज़ुबानी लिख जाऊंगा

मै अपनी ज़ुबानी लिख जाऊंगा
सदी की कहानी लिख जाऊंगा
आसमान पे उड़ते सूखे बादल
आँखें बिन पानी लिख जाऊंगा
दिन ज्वालामुखी का लावा सा
रातों को तूफानी लिख जाऊंगा

राजा मंत्री संत्री सभी भ्रष्ट और
जनता धनदीवानी लिख जाऊंगा

सच की बात सिर्फ किताबों में
ग़ज़ल में बेमानी लिख जाऊँगा

मुकेश इलाहाबादी ---------------

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