प्यार ही प्यार करूँ

प्यार  ही  प्यार  करूँ
तुझसे  इक़रार  करूँ

जब - जब  रूठो तुम
मिन्नतें सौ बार करूँ

हया  का परदा  हटा 
नज़रें  तो  चार  करूँ

ग़र बिछड़ूं तुझसे तो
आखें अश्कबार करूँ

तेरे सारे वायदे झूठे
फिरभी ऐतबार करूँ

मुकेश इलाहाबादी ---


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