दीवार सिर्फ दीवार होती है

चुपके से
बात सुनना अषोभन होता है
इसलिये कुछ लोग अपने कान उतारकर
दीवार से चिपका देते हैं
वर्ना,
दीवार के कान कहां होते हैं ?
दीवार के कान होता तो,
मुॅह भी होता
वर्ना वह बात सुनकर युंही खड़ी न रहती
निर्विकार
निषब्द
दीवार सिर्फ दीवार होती है
बाहर सह कर धूप पानी और बौछार
रखती है खुद को अंदर से चिकनी और चमकदार
ताकि हम रह सके शुकून और आराम से
दीवार कभी इंसान नही बनती
और न ही कभी उसने ख्वाहिश जाहिर की
जब कि इन्सान बन जाता है दीवार और
लगा लेता है कान
जो कि अषोभन होता है
दीवार सिर्फ दीवार होती है
दीवारों के कान नहीं होते
मुकेश इलाहाबादी -----------------

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