तुम्हारे मौन से उपजे


तुम्हारे
मौन से उपजे
उत्तप्त उच्छवास से
पिघल जाता हूँ मै
रिस रिस कर
 
और,बहती है एक नदी
 

दूर तक ,,,,
 

सूख जाने के लिए
अभिशप्त 


अपने ही रेगिस्तान में

मुकेश इलाहाबादी -------------

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