अपने जिस्म के ताबूत मे जिंदा हूं
अपने जिस्म के ताबूत मे जिंदा हूं
देख तो तू मै हरहाल मे जिंदा हूं
यादों का एक जंगल छोड गये थे
आज तक उसी बियाबान मे जिंदा हूं
जमाने ने कोई कसर न छोडी पर
मै अपनी खददो- खाल मे जिंदा हूं
टूट गया कांच सा वजूद, फिर भी
मुकेश, मै अपनी शान मे जिंदा हूं
मुकेश इलाहाबादी -------------------
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