तेरे प्यार का ही असर है

तेरे  प्यार का ही असर है 
मुझे नहीं,अपनी खबर है 
तू राहे ज़िंदगी में छाँह थी 
तुझ बिन धूप का सफर है  
अब कोई सुर सधता नहीं   
ज़िदंगी ग़ज़ल बे - बहर है 
किससे पूछू मै पता तेरा 
ये शहर अजनबी शहर है 
थोड़ा संभल - संभल चल 
प्यार इक कठिन डगर है 

मुकेश इलाहाबादी --------

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