तुमसे बेहतर मिला नहीं
तुमसे बेहतर मिला नहीं
मैंने भी कहीं तलाशा नहीं
मै भी तो चुप ही रहा और
तुमने भी कुछ कहा नहीं
मैंने सोचा एक ख़त लिखूं
कुछ सोच कर लिखा नहीं
ग़ज़ल औ नग्मों के सिवा
मेरे पास कोई तोहफा नहीं
एक बार मिल कर देखो तो
मै शख्श इतना बुरा नहीं
मुकेश इलाहाबादी ----------
मैंने भी कहीं तलाशा नहीं
मै भी तो चुप ही रहा और
तुमने भी कुछ कहा नहीं
मैंने सोचा एक ख़त लिखूं
कुछ सोच कर लिखा नहीं
ग़ज़ल औ नग्मों के सिवा
मेरे पास कोई तोहफा नहीं
एक बार मिल कर देखो तो
मै शख्श इतना बुरा नहीं
मुकेश इलाहाबादी ----------
Comments
Post a Comment