वो तो खारा बहुत समंदर निकला


वो तो खारा बहुत समंदर निकला
जिस्म मोम दिल पत्थर निकला

जिसको समझा, अपना  सबकुछ
दुश्मन  से  भी वो  बदतर निकला


सोना खरा मान रहे थे जिसको हम
खोटे सिक्के से भी कमतर निकला

मुकेश इलाहबदी ---------------------

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