जिसकी याद में मैंने रतजगा किया

जिसकी याद में मैंने रतजगा किया
वो, जालिम आराम से सोया किया
मुकेश जिसके लिए मैं रुसवा हुआ
उसी ने मुझको पागल दीवाना कहा
मुकेश इलाहाबादी ------------------- 

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है