रात एक नदी है

रात
एक नदी है
और
तुम्हारे ख्वाब
एक नाव
जिसपे बैठ के
मैं रोज़ पार करता हूँ
इस नदी को

मुकेश इलाहाबादी ---

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है