ये ज़िन्दगी ईश्क़गाह में गुज़रे

तू फूल की मानिंद खिल और खुशबू सा महक
या परिंदा बन जाए, मुंडेर पे बुलबुल सा चहक
मेरी चाहत है कि इक दिन तू महताब बन जाये
चाँद बन कर मेरी अंधेरी स्याह रातों में चमक
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------

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