अब तो, तुम्ही से रौशन हैं मेरे रातो दिन

अब तो, तुम्ही से रौशन हैं मेरे रातो दिन
ये चाँद और सितारे मेरे किसी काम के नहीं
मुकेश इलाहाबादी -----------------------

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