इक अनकहा सच


इक अनकहा सच
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तुम
हवा हो
खाद हो
पानी हो
धूप हो
तुम इक, खिला हुआ
फूल हो
जिसकी महक से
सुवासित है
मेरा रोम - रोम

मुकेश इलाहाबादी---

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