चाँद के उगने से, या फिर गुलों के खिलने से
चाँद के उगने से, या फिर गुलों के खिलने से
याद रखता हूँ तुझे किसी न किसी बहाने से
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------
याद रखता हूँ तुझे किसी न किसी बहाने से
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------
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