स्वाति नक्षत्र

कभी ,
तो, बरस जाओ 
स्वाति नक्षत्र की
दिव्य बूँद सा
उग,
आने दो
इक मोती, 
इस सीप के अंदर

मुकेश इलाहाबादी --




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