वो तो तेरे ख्वाब हैं, जो लोरियां सुना,सुला जाते हैं वरना नींद कहाँ आती है कमबख्त स्याह रातों में मुकेश इलाहाबादी ------------------------

वो तो तेरे ख्वाब हैं, जो लोरियां सुना,सुला जाते हैं
वरना नींद कहाँ आती है कमबख्त स्याह रातों में

मुकेश इलाहाबादी ------------------------

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